
मुंबई(अनिल मुनीश्वर)वृत्तसेवा :—————————————————राज्य प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी कार्रवाई के तहत एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वित्त एवं नियोजन विभाग के कक्ष अधिकारी विलास लाड को 6 लाख 37 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। इस घटना से मंत्रालय के कामकाज पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
आज मीडिया ने दी हुई जानकारी के अनुसार, ग्राम विकास विभाग से संबंधित एक प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के बदले आरोपी अधिकारी ने संबंधित व्यक्ति से बड़ी रकम की मांग की थी। काम को जानबूझकर लंबित रखकर रिश्वत देने का दबाव बनाया जा रहा था। इसकी शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की प्राथमिक जांच की, जिसमें आरोप सही पाए गए।
इसके बाद एसीबी की टीम ने नवी मुंबई के खारघर इलाके में जाल बिछाया। तय योजना के अनुसार जैसे ही आरोपी ने शिकायतकर्ता से 6 लाख 37 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, उसी समय टीम ने उसे रंगेहाथ पकड़ लिया। आरोपी को तुरंत हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह उजागर किया है कि मंत्रालय के स्तर पर भी भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। सरकारी काम करवाने के लिए आम लोगों को अब भी रिश्वत देने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
राज्य सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही जा रही है और ऐसी कार्रवाईयों के जरिए स्पष्ट संकेत दिया जा रहा है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि लगातार सामने आ रहे मामलों से यह भी सवाल उठ रहा है कि सिस्टम में सुधार की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है।
खास बात ये है कि बडे बडे ठेकेदार डायरेक्ट मंत्रालय जाकर पुरे महाराष्ट्र मे भ्रष्टाचार के माध्यम से घुस देकर नगरपंचायत ग्रामपंचायत मे काम मंजूर करवाके लाते है और छोटे ठेकेदारों को कमिशन के माध्यम से कामोका बटवारा किया जाता है…? इसमे बडे अधिकारी एवं मंत्रियों का सहयोग होने की संभावना व्यक्त की जा रही है…
गौरतलब है कि इससे पहले भी मंत्रालय में एक मंत्री के कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। उस घटना के बाद भी ऐसी घटनाओं का सामने आना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों के कारण आम जनता में नाराजगी बढ़ रही है और प्रशासन को अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह बनाने की मांग तेज होती जा रही है








